Mera Chand

जग-मग,जग-मग है सितारों की रोशनी,
इस जगमगाहट का मुल्य पाया नहि।
यूँ सादगी से जीवन को पहले,
सुन्दर किसी ने बनाया नहि।।
आप आए तो,बहार लाए,
भाई कह कर यह रिश्ता,
किसी ने निभाया नहि।।।

कि जग-मग,जग-मग,
सितरों कि रोशनी मे,
मेरा चाँद वो पहले नजर आया नहि।।

जिस चाँद ने हमे बिठाया है,पलकों पर,
हाथों से हमें जिसने सँवारा है,
धूल मे से निकाल कर के कंकर,
दिल मे जिसने हमे सजाया है।
वो चाँद हमने बरसों बाद,
एक बहन के रूप मे पाया है।।

कि जग-मग।जग-मग,
सितारों की रोशनी मे,
मेरा चाँद वो नजर आया है।।।

उस चाँद कि रोशनी से,
मेरा मन उज्जवल हुआ है,
सितारों मे अब कहाँ जोर रहा,
मेरा चाँद जो निकल आया है।
रोशनी है चारों और छाई,
तो'विनय' दिदार चाँद के कर पाया है।

कि 'जग-मग,जग-मग,
सितरों कि रोशनी मे,
मेरा चाँद भी ऊबर आया है।।।

वर्षों के बाद आज वो चाँद भी,
कहीं दूर मुझसे चला जाएगा,
फ़िर कहीं और जाकर चाँद मेरा,
नाचेगा-मुस्कुराएगा।।
उस चाँद की नर्माता को,
अब कोइ और होठों पर सजाएगा।।

कि 'जग-मग,जग-मग,
सितारों की रोशनी मे,
मुझे चाँद मेरा वो नजर आएगा।।।

दुआ है खुद्दा से कि,
मेरा चाँद यूँ ही मुसकुराता रहे।
खुश रहे सदा जीवन मे,
वो याद मुझे सदा आता रहे।
प्यार की इन यादों को,
तोड न जाए कोइ कहीं,
कि यह नाज़ीज़ भी उनको,
याद कभी-कभी आता रहे।।

कि'जग-मग,जग-मग',
सितारों की रोशनी मे,
मेरा चाँद यूँ हि मुस्कुरता रहे।।

जा कर के परदेस कहीं,
भूल जाए न मुझे चाँद मेरा।
सितरों के बीच यूँ ही चाँद मेरा,
खुश रहे, बरकरार रहे,
कि खुश रहने वालों की भीड मे,
अव्वल आता रहे सदा चाँद मेरा।।।

कि 'जग-मग,जग-मग'
सितारों की रोशनी मे,
कुछ बना रहे खास,चाँद मेरा।।।





© Viney Pushkarna

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