March 14, 2011

Gumshuda Lafz

 लो आयें हैं एक नई पहचान लेकर, मिटा गम, सांसों को मुस्कान देकर,

बहुत कठिन है लम्हा लम्हा कर जीना, जो आज धडकन कि आहट में खो गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



दीदार हबीब, एक तेरी रज़ा, तुहीं जाने कहाँ जील, कहाँ खुदा,

खुशी अश्क से भी होती है बयाँ , कहना कि गिरे आंसू और हम रो गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



एक आरजू उन्हें खुदा बनाने की, किरणों से जीवन रोशन कराने की,

किया सलाम, जो जुका कदमो पर, कदम आँखों से बड़े हम मोह गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



जगे तो सुबह की सूरत है वो, डली रात तो चाँद सी खूबसूरत है वो,

हर पल देखें ख्वाब उनके इन आखों में, नीची हूई पलक सोचो के सो गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



हो जाएँ चंद बातें तुमसे जो इस कदर, साँसों से धरा तक जाएँ हम बदल,

की मानो जन्मो के प्यासे इस पल, बीज प्यार के दिल में बो गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



आज कबूल खता करते है, की किस कदर तुम पर मरते है,

जो बन साथी जाओ जीवन का, तो कहूँ हम हो एक से दो गए |



विनय चाहा तो बहुत कहना उनसे, मगर गुमशुदा ये लफ्ज़ हो गए ||



© Viney Pushkarna

pandit@writeme.com

www.fb.com/writerpandit