Intezar Rahega

 
आँखें नम् हुई हैं शायद रिश्तों के बदलते किरदार देख कर,
जिनसे है खास रिश्ते, उठते मुझसे उनके विशवास देख कर |
हाँ था मुश्किल कुछ कह पाना तब कियों कि शायद समां ही था ऐसा,
दुखी था मैं भी पर संभला उनपर दुखों का पहाड देख कर ||
है खुशी कि सच्च हमने घर पर बताया है,
ना की गलती जो दिल तुमसे लगाया है |
मुझे फक्र है की तुमसा मिला साथी,
जिसने दिए संस्कारों का मोल पाया है ||
करना पूरे सब सपने घर वालों के, आखीर ये पैगाम रहेगा,
चाहे अब ना बात होगी, पर हर पल तेरा इन्तेजार रहेगा ||
जानशायद ना अब लिख मैं पाऊँ,
ना किसी को हुई दास्ताँ मैं सुनाऊँ |
जो किया मैंने कतल जज्बातों का,
काश कभी उनसे माफ़ी मांग मैं पाऊँ ||
जो था माँ दीदी भाई का वो सम्मान सदा ऐसा ही रहेगा,
चाहे अब ना बात होगी, पर हर पल तेरा इन्तेजार रहेगा ||

जो बोले बोल तुमने वादा किया,
आज मैंने भी यही है इरादा किया |
चार सालों में खुद को इस काबिल बना लूँगा,
ना भुजने दूंगा ये प्यार का दिया ||
है कसम की इस दिए की लो से उजाला होता रहेगा,
चाहे अब ना बात होगी, पर हर पल तेरा इन्तेजार रहेगा ||

एक और वादा मैं तुमसे चाहता हूँ,
गिरें ना अश्क तो मैं जी पाता हूँ |
चाहे है मुश्किल यह सब कर पाना,
तेरे विशवास में मैं विशवास पाता हूँ ||
है ये आस की विशवास तुमारा सदा मेरे साथ रहेगा,
चाहे अब ना बात होगी, पर हर पल तेरा इन्तेजार रहेगा ||

तो अब मैं मेरे लफ़्ज़ों को लगाम लगाता हूँ,
जब तक ना तुम कहो ना कोई कवि बनाता हूँ |
जो २० कविताएँ में छुपे है यादों के दिन,
आज से क्या अभी से बना ताबीज सीने लगाता हूँ ||
शायद आज फिर गुम हुए उन लफ़्ज़ों का खैआल रहेगा,
चाहे अब ना बात होगी, पर हर पल तेरा इन्तेजार रहेगा ||

आज से फिर अपने आप से बात होगी, जो मिला ना जवाब तो सपनों में मुलाकात होगी,
करूँगा हर पल सदा याद तुमको, और लबों पर लिए तेरे हर पल फरियाद होगी |
वादा रहा की जैसा कहा तुमने इन्तेजार रहेगा, चार साल ये दिल बना मेहमान रहेगा |
जब तक हैं साँसे साँसों में बसा प्यार रहगा, चाहे अब ना बात होगी मगर तेरा इन्तेजार रहेगा ||


© Viney Pushkarna

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