JAAN -The Name

 
पूछा उनहोंने क्यों हमको जान कहते हो,
 लफ्ज़ और भी है क्यों इसी पर रहते हो |
कहूँ कैसे कि फूलों से मुस्कान होती है,
कि जो सांसों में रहे वोही जान होती है ||

सांसों में जो रहे, वो जान होती है,
चलते हर रस्ते का, मुकाम होती है |
लफ्ज़ छोटा लगे, पर है जहाँ इसमें,
येही सांसों और दिल के, दरमियान होती है ||

महक फूलों की पसंद सुबहों शाम होती है,
जैसे हर सुबह लाई एक पैगाम होती है |
जग जाने मोल आँखों से गिरते मोतिओं का,
जाने वोही जिसे दिल की, पहचान होती है ||

विनय, लिखी हर कविता आम होती है,
छु जाये जो दिलको, तो अरमां होती है |
कुछ बातें नहीं होती मुहं पर कहे जाने से,
कलम लफ्ज़ और सियाही सांसे कुर्बान होती है ||

नाम हर किसी की, पहचान होती है,
दे जो कोई प्यार से, तो शान होती है |
अनेक लफ्ज़ है, चाहे इस जुबान पर,
पर जो रहे साँसों के करीब, वो जान होती है ||

दोस्ती का नाम, जान है,
प्यार पर मान, जान है |
तुमारी मुस्कान, जान है,
मेरा अभिमान, जान है ||

जान बसे मेरे, साँसों में,
तुम पर कुर्बान, जान है |
महकता ये जहाँ, जान है,
दिलों के अरमां, जान है ||
पवन में तरंग, जान है,
विनय की उमंग, जान है |
जमाना है दंग, जान है,
ख्वाहिशों की फ्लंग, जान है ||

मीत की प्रीत, जान है,
प्यार की हर रीत, जान है |
दिल का हर गीत, जान है,
मेरा ये मनमीत, जान है ||

खुशी और गम, जान है,
आप और हम, जान है |
ली वो हर कसम, जान है,
कुदरत के सितम, जान है ||

सागर और गगन, जान है,
प्यार में मगन, जान है |
सियाही और कलम, जान है,
ये सब तेरे संग, जान है ||

लो अपने तो बता दिया कारण तुम्हें जान कहने का,
रहस्य येही है प्यार में जहाँ के रहने का |
तुम जहाँ हो हमारा, वजह हो दिल में रहने की,
आज बोल दी शायद ताकत नहीं थी कहने की ||



© Viney Pushkarna

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