Kabool Hai

 
विनय बनना खुदा ना मैं चाहूँ मुझे फकीरी कबूल है, जहाँ हो ना साथ तुम्हारा ना ऐसी अमीरी कबूल है |
ना कबूल है अकेले इन राहों पर चल पाना, ना बिन तेरे सांस कि वजह तख्दीरी कबूल है ||

चंद सांस आते है चंद पलों में ठहर जाते हैं,
चंद ही बन यादों का कारवा, आसों को महकाते है |
चंद मिल उस चाँद को बनाते है, चंद ही चुने अपनों को बोल पाते है,
इन चंद चाहत के चालकों को कुछ चंद ही समझ पाते है ||
चंद चंद कर चुनी चंद यादों को खुद से दूर कर पाना फजूल है,  
जो तुम हो साथ तो सांसों कि जंजीरी, जान इस इंसान को कबूल है |||

खुद कर खुदा कि बंदगी ऐसी ,कि खुद खुदा खुशामदीद कर उठे,
खुदा बना खुद के प्यार को कि, खुदा देख तेरी खुद्दारी को कह उठे |
ना आशिक खुदा देखा तेरी खुदाई सा कहीं, जो इश्क में तुम बह उठे,
खुद्दारी है खुदा तेरे इश्क की, कि देखना नम् आँखे ना ये बह उठें ||
प्यार खुदा खुद्दारी सांसों में विनय बसीं, जो खुदा बनाया त्रिशूल है,
जो तुम हो साथ तो सांसों कि जंजीरी, जान इस इंसान को कबूल है |||

साथ अपनों को लेकर सच्चे साथ के सपने सजाएं,
साथ सात जन्मों का वादा कर एक दूजे को अपनाएं |
साथी मैं तुम्हारा तुम मेरे, जीवन के हर मोड पर कहलाएं,
साथी देंगे साथ सदा एक दूजे का, कर वादा अपना बनायें ||
साथी हम साथ सदा तेरे होंगे, ऐसा सांसों को मिला बनाया असूल है,
जो तुम हो साथ तो सांसों कि जंजीरी, जान इस इंसान को कबूल है |||

राज़ रश्मि बन चारों और उजाला कर गया,
राज़ ही रगों में बन सरगम घर कर गया |
राज़ रज़ा की राहों में जो, बन हाथी पसर गया,
है खुशी की प्यार राज़ से बाजी हर गया ||
मिटा राज़ आज प्यार रज़ा बन बैठा, जैसे सांस मुझमे और जड़ पेड़ बबूल है,
जो तुम हो साथ तो सांसों कि जंजीरी, जान इस इंसान को कबूल है |||

हम तो वादा करते है ना कभी दूर तुमसे होंगे जीवन के किसी शोर पर,
प्यार है हमारा खुदा ना कुछ करेंगे ताकत के जोर पर |
एक तुम्हारा साथ ही है जान जीवन में, ना लगाना इसे तोल पर,
जब तक रहेंगी साँसे इस तन में, ना आने देंगे आँच प्यार अनमोल पर ||



© Viney Pushkarna

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