मैं हो बेचैन आज रोते हुए तेरी झोली हूँ आन गिरा,
तेरे दिए जन्म से ही आज मुझे यह जहान मिला |
मैंने सपने देख अनेकों लिए पर न तेरे सपनों पर ध्यान दिया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने साथी तुझसे मांग लिया ||
तुने माँ मुझे पाला पोसा, ज़रा न अभिमान किया,
मैंने ढूँढ शायद अपना जीवन साथी तेरा माँ अपमान किया |
पर है सच यह भी के उसे मैंने अपना सब कुछ मान लिया,
नहीं रहा जाता अब बिन उनके ऐसा अटूट रिश्ता है बांद लिया ||
है खामोशी लबों पर मेरे, शायद इस लिए जो मैंने गुनाह किया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने साथी पहचान लिया ||
मैं करता हूँ ये वादा माँ की सपने तेरे भी अपनाऊंगा,
जब होगा मेरा साथी साथ क़दमों से न डगमगाउंगा |
बढता रहूँगा हर कदम मैं आगे जो साथी को ताकत बनाऊंगा,
आप खुश होगे माँ जब आपका नाम आकाश तक ले जाऊंगा |
ज़माना तो नहीं जीने देता, पर मैंने परिवार पर है विश्वास किया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने साथ साथी का मांग लिया ||
हम जान पंडित का साथ मांगे, बढते क़दमों की पहचान मांगे,
पर बढते क़दमों संग परिवार के लबों पर भी मुस्कान मांगे |
नहीं चाहिए हमे समाज का शाने तोहफा, इंसान तो बस प्यार मांगे,
सब मुख फेर जाते हैं मुश्किल राहों पर, इसी लिए तो हम आपका आशीर्वाद मांगे ||
हैं दर्द एक दूजे से दूर रहने का, आज तक हमने ज़र लिया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने प्यार खुदा कर लिया ||
किया वादा साथ निभाने का, अप्रैल तक साथ आ जाने का,
था सवाल शिवा को साक्षी बनाने का, वरना धूल में मिल जाने का |
एक वादा था सच बताने का, परिवारों को है प्यार कह पाने का,
हमे फ़िक्र हैं परिवारों की, न कभी था डर ज़माने का ||
परिवारों का साथ है जरूरी, येही हमने वादा था एक दूजे से किया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने इकरार कर लिया ||
रिश्ते मेरे हैं बाकी भी अनमोल, भाई - बहन और भाभी के बोल,
पिता जी की डांट और वो मीठे बोल, रखें हैं पास सदा करके तोल |
मुझे लादो मेरे साथी का साथ, जो है सारे रिश्तों का घोल,
रिश्तों का मतलब है पता हम दोनों को, तभी तो बैठें है दरवाजे खोल ||
माँ मुझे चाहिए हैं सब रिश्ते, इसी लिए हैं आपसे बियान किया,
हो सके तो मुझे माफ करना माँ जो मैंने प्यार कर लिया ||
![]() | © Viney Pushkarna pandit@writeme.com www.fb.com/writerpandit |
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