My Life In Short


किन उल्जनों में आज दफ़न हो चले हो पंडित, कि राह सुनसान है मगर अकेले चलना है,
किन मंजिलों कि करते हो बातें प्यार और वफ़ा के दर पे, अभी तो गिर गिर संभालना है |
हाँ आज कुछ लम्हें अश्क नैनों से बहार आ गए, सोच कर कि  कैसे ये वक्त गुज़ारना है,
मगर न डगमगाए कदम चल संभल कर पंडित, कि किया हर वादा जान को पूरा करना है ||

एक छोटी सी प्रेम कहानी मोहोब्बते तालीम कि ज़ुबानी

गुरूवार तारिक २४ एक अनजान, अनजान सी दुनिया में आया,
बढते बढते देख इस जहान को रोया, खेला और मुस्कुराया |
माँ माँ और चंद अलफ़ाज़ अभी सीखे थे, कि बादल काला छाया,
चंद चिकित्सकों ने किया बीमार, हो पीलिया गया सुनाया |
जब दे गए जवाब सभी तब भी चले नाना जी, न माँ को था बताया,
ऐ खुदा आज मैं पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो ऐसा जीवन पाया ||

न देखे नानू कभी होश संभाले, मुझे था उन्होंने बचाया,
सिर्फ तस्वीर में देखा सुना, जैसा अपनों ने बताया |
माँ पिता के उपकार हैं लाखों, जो पाला पोसा इस लायक बनाया,
एक  भाई जो मेरे संग रहा सदा, जिसने मुझे चलना सिखाया |
न जाने कैसे अदा कर पाउँगा वो क़र्ज़ जो प्यार के रूप में पाया,
ऐ खुदा आज मैं पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो आंसू बह आया ||

चला जो मैं तो रंग बिखरे ऐसे कि सबसे आगे हाथ बढाया,
दया नन्द में अतुल,सुमित,सुरिंदर और विकास पाया |
आगे बड़ा तो रंग बदले देखे पर अपना ही माहोल सजाया,
डडी, हर्ष, सागर, जगजीत, गोरी, तजिंदर दे हाथों में हाथ आया ||
चंद बूंदे गिरी जो प्रेम कि, दिल में जीवन का एहसास आया,
ऐ खुदा आज मैं पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो मैं कह न पाया ||

आदर्श जा जिंदगी में पहली बार किसी लड़की को बुलाया,
जिंदगी में थी जिसकी कमी बना उसे बहन अपनाया |
इन साथियो संग चलते इन्हीं पर अपना जहाँ थमाया,
जिसका किसी को न था पता, बस इन्हें था बताया |
फिर चलते चलते किसी ने पाँव काँटा चुभाया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो दर्द दिलाया ||

दिन गुजरते गए प्यार बढता गया, पर कभी गया न सुनाया,
मिलते थे राह में कभी कभी, मगर कभी कह न मैं पाया |
चलता था उन्हीं कि यादों में, था प्यार लबों में थमाया,
कहीं टूट न जाएँ रिश्ते, येही सोच रहता था घबराया |
किन उल्जनों में था मैं फस बैठा, कियों न मैंने बताया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो इतना तरसाया ||

यारो ऐसे ही चलते चलते एक दिन राह मिल आया,
चैट पर करके पहली बार बात ये चेहरा खिलखिलाया |
चंद दिनों में पहली बार करीब उनके जा पाया ,
दिया  दोस्तों ने जो साथ तो है प्यार बताया |
सुन उनकी कहानी मैंने, उनके राह से खुदको लौटाया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो मुझे रुलाया ||

पंडित करते करते प्यार उन्हें आज उनको भी हो आया,
लगता है चलते चलते समां आज खुशी ने रुकाया |
भला हो उस इंसान का जो बन फरिश्ता था आया,
इतने दिन जिसने हुए इकरार बाद हमे था मिलाया |
इसी बीच हमने सब सच सबसे पहले घर वालों को बताया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था मेरा कसूर, जो हर रिश्ता गवाया ||

दो जून को जो किया था वादा आज वो दिन है आया,
निकला सुबह सात बजे, करूँगा हर पल बयां था दिल को समझाया |
पहले निकले मंदिर हमने दुर्ग्याना था शीश निवाया,
फिर गए वाटर पार्क,बाडर और पूरा शहर घुमाया |
एक दिन ये सांस अटक गए लीं हैं नींद की गोलियन सुनाया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो पल पल मुझे सताया ||

इस सबसे निकल आठ को शिवा साक्षी बनाया,
कर शादी मंदिर में दोनों ने लिया वचन उठाया |
बहुत कुछ देखा दिनों में, नहीं रात रात भर सो पाया,
करता हूँ हर बचाने की कोशिश जो आशियाना सजाया |
जब  खुद की माँ और बहन से बात, तो बहुत कुछ सुनाया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो रिश्ता हमारा न अपनाया ||

हर पल साथ चला, दिया होंसला जब साथी घबराया,
१४ जुलाई को हर दम साथ रहने का यकीन दिलाया |
अपनी जिंदगी आज करदी नाम उनके, सारा दिन साथ बिताया,
याद  है मुझे वो हर पल,जगह और राह जहाँ रिश्ता ये महकाया |
न छोड़ा घर, न भागे, बड़ा घर वालों को समझाया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो अपनों को ही साथ न भाया ||

हम मिलते, करते प्यार, और साँसों को घहराया,
पंडित ने लिए प्यार सर माँ तेरे क़दमों पर झुकाया |
आज बनकर भिखारी मैं हर चौखट मांग कर आया,
मेरे लिए मेरे घर वालों ने भी कितना है समझाया |
आखिर फिर सच्चा प्यार ही दुद्कार से मिल आया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो मिला कर दूर हटाया ||

न जाने गलत फेह्मी का पहाड़ कहाँ से है आया,
पर घर वालों की खुशी के लिए येबी लिया उठाया |
पंडित कि कोशिश बहुत मगर गया पैर डगमगाया,
मगर जान की खुशी के लिए हर आंसू छुपाया |
आज कितना रोता हूँ पल पल, कितना दर्द घहराया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो एक रात भी सो न पाया ||

आज दूर हूँ चाहे, मगर जो बोले तो देख सांस हथेली आया,
नहीं होगा कोई और इस जिंदगी में कभी देख वादा येबी निभाया |
कहते हैं शादी और साँसे वफ़ा एक से होती हैं,
मैं तो ले चल पड़ा, ले तेरा पंडित तेरा ही जोगी होइया |
जो तलाश है इस दिल को सकूं की, वो तुझमे ही खोइया,
ऐ खुदा आज पूछता हूँ क्या था कसूर, जो मेरे साथ ए होइया ||



© Viney Pushkarna

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