Ek Gari

मैने न सोचा था कि,
जीवन मे ऐसी भी घडी आएगी।
कि जब वो मुझे यूं,
अन्धेरी राहों पर छोड जाएगी।।
दिल मेरा तो अभी भी,
उसी के गुन गाता है।।।
ये जान तो अभी भी उसी पर मिट जाएगी।।।।
मैने ना सोचा था_ _ _ _ _ _ _
किसके कारण था,
उसने मुझे छोड दिया।
क्यों जीवन को मेरे,
आंधियों मे रोल दिया।।
ना दिया मोक्का सम्बलने का,
मुझे आज खाक से तोल दिया।।।
मैने ना सोचा था _ _ _ _ _
जिस खवाब को,
रिश्तों सा सम्मान दिया।
जिस के लिये जीवन कुरबान किया।।
न मालुम था कि वो,
ऐसा जुलम कर जाएगी।
आँखों मे दे करके आँसु,
वो घाडी निकल जाएगी।।।
मैने ना सोचा था _ _ _ _




© Viney Pushkarna

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