Ro Dia

 
लफ्ज़ थे पास मेरे, जो दीदी ने ये पूछ लिया,
जब पुछा था मैंने, तब कह मजाक कियों दिया |
पर कैसे कहता, कैसे खोल ज़ज्बात देता,
अभी बोला नहीं था जान को कैसे मुकाम सोच लेता ||
जाने कियों लगा उनका विशवास मैंने खो दिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
दीदी बोले कि तुमने दोस्ती कि हमसे अपने फायदे के लिए,
कैसे बताऊं मैं जान लुटा देता हूँ अपने काईदे के लिए |
सच में मैं आपसे दिल कि हर बात कह लेता था,
बहन से भी ऊँचा दिल में स्थान बना देता था ||
हाँ ये सच है कि बीज शक का मैंने ही बो दिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
शायद इसी लिए मैं बताना नहीं चाहता था,
दोस्त बच्पन्न का गवाना नहीं चाहता था |
इसी लिए रहा कई सालों दूर मैं अपनों से,
कियों के लगता था डर मुझे हर सपनो से ||
शायद सच बोल मैंने सब गुनाहों को धो दिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
मुझसे जायदा कौन समझे जरूरत रिश्तों की,
होना सब दूर नौबत आए किश्तों की |
बचपन से दोखा खा खा कर आज रिश्तों को उरेजा है,
तभी तो आज ये कविताए पैगाम हमने आप के नाम भेजा है ||
आपने लगाए इलज़ाम से रूबरू तो मैं हो लिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
खुदा तूं मौत दे देना अगर मेरे प्यार में कोई खोट है,
बेईमान दिया मुझे नाम आपका ये सबसे बड़ी चोट है |
कदर है माँ की भी तभी सब सच कहने को बोला है,
जो होती कदर हर रिश्ते की तो कियों ये गम उडेला है ||
जो किया है हमने सच्चा प्यार, ये नाम तो दिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
शायद मैं गलत हूँ कुछ रिश्ते निबाने में,
पर पता ही नहीं लगा पल गुजार जाने में |
की कोशिश थी हर हद्द तक खुद को स्म्बाल पाने को,
शायद येही मंजूर था उस खुद को खुदा कहलवाने को ||
रजा थी खुदा की कराया जो प्यार उससे, मैंने लो किया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया |||
अगर गलत थे तो क्या सच सामने ला पाते,
क्या है सच्चाई क्या आपको सब बता पाते |
कई लोग हैं जहाँ में जो खेलते है दिलों से,
अगर होते जो हम वैसे तो क्या ये सुना पाते ||
है सचा प्यार इस दिल में जो नाम जान जिसको दिया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया ||| 
वो चाहती है पूरे हर सपने करने जो घर वालों ने देखें है,
आसान नहीं है पता उससे जिसने लोह हाथ सेके हैं |
है कदर हम दोनों को जो है हर आस आपकी,
शायद ज़रूरत थी मुझे भी थोड़े से विशवास की ||
करता रहूँगा उसी से प्यार ये वादा उसको किया,
चाहते भी आज फिर एक बार मैं रो दिया ||||


© Viney Pushkarna

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